आसमान में साड़ी का मान बढ़ाने वाली India की Wonder वूमन, प्रेरणादायक है शीतल की कहानी

इस जिंदगी में हर कोई आसमां छूना चाहता है, हर कोई ऊंची छलांग लगाना चाहता है। कोई शोहरत के लिए तो कोई दौलत के लिए, छलांग सब लगाते हैं लेकिन सिर्फ अपने-अपने मतलब के लिए। मगर हमारे बीच एक ऐसी शख्सियत भी मौजूद है, जिसने छलांग तो लगाई मगर एक नेक मकसद के लिए। भारतीय संस्कृति और परिधान को प्रमोट करने के लिए उसने डर और दुनियादारी के दायरों की दीवार को लांघकर, आसमां की अनंत ऊंचाई से ऐसी छलांग लगाई कि देखने वाले भी देखते रह गए और होश वालों की आंखें खुली की खुली रह गईं। इस एक छलांग ने उसकी जिंदगी को एक नई ऊंचाई दी और आसमां तक उसका नाम हुआ।

‘भारतीय परिधान की पहचान को दी आसमां की ऊंचाई’ 

पैराशूट पहनकर आसमान से कूदना काई नई बात नहीं है लेकिन अगर कोई 9 मीटर लंबी साड़ी पहनकर 13 हजार फीट की ऊंचाई से छलांग लगाता है तो ये वाकई आश्चर्यजनक काम है। और इस अनोखे कारनामे को कर दिखाया है एक भारतीय महिला ने, जिन्होंने स्काइडाइविंग का एक अनोखा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 

महाराष्ट्र के पुणे की रहने वाली 35 साल की जाबांज शीतल राणे महाजन ने थाईलैंड में 13 हजार फीट की ऊंचाई से साड़ी पहनकर छलांग लगाकर एक नया इतिहास रचा है।

कपड़े, रंग, जाति, धर्म इन सबसे ऊपर है एक इंसान का जज्बा।  यही जज्बा पुणे में रहने वाली शीतल राणे के अंदर भी है। शीतल ने पिछले महिला दिवस के मौके पर थाईलैंड के पटाया में महाराष्ट्रियन नौसारी साड़ी पहनकर 13 हजार फीट की ऊंचाई से स्काइडाइविंग की और साड़ी पहनकर स्काइडाइविंग करने वाली पहली भारतीय महिला बनने का नया इतिहास रच दिया।शीतल के मुताबिक वो अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कुछ अलग करने के साथ ही साबित करना चाहती थी कि भारतीय महिला न केवल अपने सामान्य दिनचर्या में साड़ी पहनकर कामकाज कर सकती हैं बल्कि स्काइडाइविंग जैसे जोखिम भरे एडवेंचर को भी अंजाम दे सकती हैं।

”देश में महिलाएं विभिन्न तरह की साड़ी पहनती हैं, लेकिन महाराष्ट्र की नौसारी साड़ी को पहनना और इसे संभालना सबसे मुश्किल है। इसे पहनकर मैं यह साबित करना चाहती थी कि भारतीय महिला न केवल अपनी  सामान्य दिनचर्या में यह साड़ी पहन सकती हैं बल्कि स्काइडाइविंग जैसे जोखिम भरे एडवेंचर को भी अंजाम दे सकती है “

अमूमन स्काइडाइवर छलांग की तैयारी करते वक्त अपने शरीर पर जो लिबास या कॉस्ट्यूम पहनते हैं वह एकदम फिट होता है ताकि ऊंचाई से छलांग लगाते समय तेज हवाओं के थपेड़े उलझन न पैदा करें। लेकिन कुछ अलग करने का जुनून शीतल पर इस कदर सवार था कि वो 9 मीटर से ज्यादा लंबी साड़ी पहनकर छलांग लगाने का जोखिम लेने से भी नहीं घबराईं।शिवा जी महाराज की जयंति के मौके पर भी शीतल महाजन ने यूएस के फ्लोरिडा में शिवाजी का फ्लैग लेकर 7 हजार फीट की ऊंचाई से नौसारी साड़ी पहनकर छलांग लगाई। 

ये ‘दौड़’ आपका दिल जीत लेगीहाल ही में शीतल ने मिस्र के पिरामिड्स से 15000 फीट की ऊंचाई से नौसारी साड़ी पहन के स्काईडाइविंग कर एक और अनोखा रिकार्ड बनाया है। इस दौरान दुनिया के 35 देशों के 156 स्काईडाइवर्स ने भी शीतल के साथ पिरामिड से छलांल लगाई।

साड़ी फहनकर 13 हजार फीट की ऊंचाई से स्काईडाइविंग करने वाली शीतल अब साड़ी में ही अंतरिक्ष को फतह करने के अरमान संजोए हुए हैं।

2003 से एडवेंचर स्पोर्ट्स की दुनिया में पहचान बना चुकी शीतल पहली भारतीय हैं,जिन्हे पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। शीतल दो जुड़वां बेटों की मां हैं। स्काईडाइविंग में 18 नेशनल और 6 से ज्यादा इंटरनेशनल रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकीं शीतल अपने 14 साल के करियर में नेशनल और इंटरनेशलन लेवल पर 708 स्काईडाइव लगा चुकी हैं।शीतल के दो जुड़वां बेटे हैं, जिनकी उम्र 10 साल है।  शीतल ने साल 2004 में नॉर्थ पोल में हेलीकॉप्टर से बिना प्रैक्टिस किए छलांग लगाई थी, जिसके बाद  उन्हें काफी लोकप्रियता मिली।

दिलचस्प है सफर के शुरूआत की कहानी

शीतल ने बताया कि 2000 में वो पुणे में अपने घर के पास वाले प्रेस की दुकान से जब घर के कपडे़ लाने गई थी तब उसकी नजर कपड़े पर लपेटे गए न्यूज पेपर पर पड़ी। पेपर में कमल सिंह ओबड की फोटो छपी थी। कमल उस वक्त पुणे के NDA में पोस्टेड थे। शीतल के सहेली के बड़े भाई होने की वजह से शीतल ने कमल से फोन पर बात की और उनसे अखबार में छपने की वजह पूछी। इस पर कमल सिंह ने शीतल को खबर पढ़ने को कहा। शीतल ने अंग्रेजी नहीं आती ये कहकर फोन काट दिया।

कमल सिंह ओबड पहले भारतीय थे जिन्होंने नॉर्थ पोल और साउथ पोल पर स्काइडाइविंग की थी। शीतल ने वो खबर देखी और ठान लिया के उन्हें स्काइडाइवर बनना है। दो साल के प्रयास और जिद्द के बाद शीतल ने आर्टिक सर्कल पर उनके जीवन की पहली स्काइडाइव की। अप्रैल, 2004 में शीतल ने नॉर्थ पोल पर माइनस 37 डिग्री टेम्परेचर में 2400 फीट से छलांग लगाई। 2016 में अंटार्कटिका में 11,600 फीट से जंप किया। तब शीतल की उम्र महज 23 साल थी और ऐसा करने वाली दुनिया की पहली और यंगेस्ट महिला बनीं।

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