अकेले ही WORLD CUP जीतेंगे विराट कोहली, नहीं मिलेगा टीम का सपोर्ट!

सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली।

सचिन तेंदुलकर का मानना है कि भले ही अच्छा प्रदर्शन करना विराट कोहली के लिए रोज की बात हो गई हो, लेकिन बिना टीम के साथियों के सहयोग के वे विश्वकप नहीं जीत सकते। सचिन ने एक इंटरव्यू में विश्व कप के लिए चुनी गई भारतीय टीम और नंबर 4 की पोजिशन पर बल्लेबाजी को लेकर चर्चा की।

सचिन ने कहा- विराट अकेले वर्ल्डकप नहीं जिता सकते, दूसरों को भी अच्छा प्रदर्शन करना होगा. एक खिलाड़ी के दम पर टूर्नामेंट नहीं जीता जा सकता- तेंदुलकर. सचिन ने कहा- हमारे खिलाड़ियों ने पर्याप्त क्रिकेट खेली है, वे अपना रोल जानते हैं

न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में सचिन ने कहा- मैं सोचता हूं कि आपके पास हमेशा कुछ ऐसे खिलाड़ी होते हैं, जो हर मैच में अच्छा प्रदर्शन करते हैं। लेकिन, बिना टीम के सपोर्ट के आप ज्यादा कुछ नहीं कर सकते। केवल एक खिलाड़ी के दम पर आप एक टूर्नामेंट नहीं जीत सकते। जब तक अहम मौकों पर दूसरे प्रदर्शन नहीं करते, तब तक ऐसा करने का कोई रास्ता नहीं है। अगर ऐसा नहीं होता है तो ये निराशाजनक होगा। सचिन से पूछा गया था कि क्या कोहली पर उसी तरह का दबाव है, जैसा सचिन पर 1996, 1999 और 2003 के विश्वकप में था।

‘टीम में नंबर 4 पर बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ी हैं’
नंबर 4 पर बल्लेबाजी के सवाल पर तेंदुलकर ने कहा- हमें लगता है कि हमारे पास ऐसे बल्लेबाज हैं, जो इस काम को कर सकते हैं। नंबर 4 केवल एक नंबर है। मैं इसे लेकर कोई खास परेशानी नहीं देखता हूं। हमारे लड़कों ने पर्याप्त क्रिकेट खेली है। उन्हें उनका रोल मालूम है, फिर वह नंबर 4, 6 या 8 हो। हालात को ध्यान में रखना ही अहम है।

‘सपाट पिचों और 2 नई गेंदों ने गेंदबाजों का काम मुश्किल किया’
तेंदुलकर ने कहा, “सपाट पिचों पर दो नई गेंदों ने मुकाबले को एकतरफा कर दिया है। यह गेंदबाजों के जीवन के लिए और ज्यादा मुश्किल हो गया है। एक टीम 350 रन बनाती है और दूसरी टीम 45 ओवर में यह लक्ष्य हासिल कर लेती है। गेंद हमेशा हार्ड रहती है। मैं यह कहना चाहता हूं कि आपने आखिरी बार वनडे मैचों में रिवर्स स्विंग कब देखी थी?”

‘पहले डेथ ओवर्स में गेंद सॉफ्ट हो जाती थी’

उन्होंने कहा, “जब हम लोग खेलते थे, तब एक नई गेंद होती थी। गेंद 28वें और 30वें ओवर से रिवर्स स्विंग होना शुरू हो जाती थी। कुछ टीमें और ज्यादा जल्दी रिवर्स स्विंग कराने लगती थीं। डेथ ओवर्स में गेंद सॉफ्ट हो जाती थी और उसका रंग भी उतर जाता था। उस समय के बल्लेबाजों के लिए ये कुछ चुनौतियां रहती थीं। लेकिन, अब गेंदें हार्ड रहती हैं और बल्ले और ज्यादा बेहतर होते जा रहे हैं।”

‘कलाई के स्पिनर्स की भूमिका अहम होगी’
तेंदुलकर का मानना है कि कलाई के स्पिनर्स की भूमिका टूर्नामेंट में अहम होगी। उन्होंने कहा, “हमारे पास युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव के रूप में ऐसे दो गेंदबाज हैं। हालांकि, वे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज में सफल नहीं रहे थे। इसके बावजूद इसका असर इंग्लैंड में नहीं होगा। ऐसे कई गेंदबाज हैं जिन्हें बल्लेबाज जल्दी भांप लेते हैं, फिर भी उन्हें सफलता मिल जाती है। इसलिए, कुलदीप-चहल को ऑस्ट्रेलिया सीरीज को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है।

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *