‘विराट राजनीति’ के शिकार हुए थे कोच कुंबले, इस चीज से परेशान थे खिलाड़ी

Biggest conspiracy of indian cricket history, when Anil Kumble resigns as coach

अनिल कुंबले, टेस्ट क्रिकेट में मुथैया मुरलीधरन (800) और शेन वॉर्न (708) के बाद तीसरे सबसे सफल गेंदबाज, जिनके नाम 619 विकेट हैं। आज ‘जम्बो’ 49 साल के हो गए। 17 अक्टूबर 1970 में बेंगलुरु में कृष्णा स्वामी और सरोजा के घर जन्मे इस लेग स्पिनर ने भारतीय टीम की न सिर्फ कप्तानी की बल्कि कोच जैसा अहम पद भी संभाला, लेकिन बतौर कोच कुंबले वह कमाल नहीं दिखा पाए, जैसा उन्हें गेंद के साथ करते देखा जाता था। कुंंबले का टीम इंडिया का कोच पद संभालना और इस्तीफा देना भारतीय क्रिकेट इतिहास के विवादित किस्सों में से एक है। आइए आपको बताते हैं किस तरह कप्तान विराट कोहली ने भारतीय क्रिकेट की त्रिमूर्ती सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण की पसंद पर एतराज जताते हुए एक कोल्ड वॉर शुरू कर दिया था।

कुलदीप यादव

किस्सा 2017 का है, 20 जून को अनिल कुंबले ने भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के पद से इस्तीफा जरूर दिया, लेकिन रूपरेखा 25 मार्च, 2017 को बननी शुरू हो गई थी। धर्मशाला में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सीरीज के चौथे टेस्ट के लिए विराट कोहली कंधे की चोट की वजह से उपलब्ध नहीं थे। अजिंक्य रहाणे टीम के कप्तान थे, लेकिन बड़ा सवाल ये उभर रहा था कि कोहली की जगह प्लेइंग इलेवन में किसे शामिल किया जाए।

कोहली की राय थी कि टीम में उनकी जगह कोई बल्लेबाज खेले, लेकिन मुख्य कोच अनिल कुंबले ने कार्यवाहक कप्तान रहाणे के साथ सलाह-मशविरा कर अतिरिक्त गेंदबाज कुलदीप यादव को मौका दिया। ‘चाइनामैन’ कुलदीप ने पहली पारी में चार विकेट लेकर अपने चयन को सार्थक बताया, लेकिन दूसरी पारी में उन्हें कोई कामयाबी नहीं मिली। हालांकि टीम इंडिया ये मुकाबला आठ विकेट से जीत गई। मैच के बाद कोहली ने मीडिया से कहा, ‘जिंक्स (रहाणे का निक नेम) और अनिल भाई पांचवें गेंदबाज को मौका देना चाहते थे और ये एक शानदार फैसला रहा। कुलदीप ‘एक्स फैक्टर’ साबित हुए।’

टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम में अनिल कुंबले ने ये कह दिया कि अनुभव भी कोई चीज होती है, यही बात कोहली को खटक गई।

विराट कोहली, अनिल कुंबले और कुलदीप यादव

अनिल कुंबले की प्रतिबद्धता की मिसाल आज भी दी जाती है, लेकिन इन सबके बीच उनमें एक जीनियस वाला अड़ियलपन भी रहा है। भारतीय क्रिकेट के तमाम चमकदार सितारों के बीच उनका ये अड़ियलपन उनके सौम्य विचारों के चलते कभी बाहर नहीं आ पाया, लेकिन अनिल कुंबले का सामना इस बार ऐसे स्टार से था जिसकी कामयाबी उसके कदम चूम रही है।

टीम के दूसरे क्रिकेटरों को भी कुंबले किसी कड़क हेडमास्टर की तरह नजर आ रहे थे। कुंबले ने जुलाई 2016 में वेस्टइंडीज दौरे पर जाने वाली टीम के लिए कुछ नियम बनाए थे।

  1. कहीं भी देर से आने पर 50 डॉलर का जुर्माना।
  2. हर चौथे दिन होगी टीम मीटिंग।
  3. अनुशासन और टीम प्लानिंग पर ध्यान।
  4. एक दूसरे की शिकायत का मौका।
  5. अभ्यास के साथ मस्ती की इजाजत

लिहाजा 2017 चैम्यिपंस ट्रॉफी से ठीक पहले कोहली ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सीईओ राहुल जौहरी को एक एसएमएस कर दिया- ‘ही इज ओवरबियरिंग।’ इस एक संदेश के बाद वो सब कुछ हुआ जो विराट कोहली और अनिल कुंबले के बीच के मतभेद को पाटने के लिए किया जा सकता था। ये सब केवल अनिल कुंबले की कद की वजह से संभव हो पाया।

सीएसी कमेटी

भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने सचिन तेंदुलकर से मध्यस्थता करने को कहा, उन्होंने इस बाबत कोहली से बात भी की। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों ने भी कोहली से बात की, लेकिन कोहली अड़े रहे कि कुंबले उनकी सीमाओं में आकर दखल देते हैं।

अनिल कुंबले का कोच के तौर पर रिकॉर्ड भी शानदार था। टीम इंडिया ने उनकी कोचिंग में खेले 17 टेस्ट मैचों में 12 जीते और केवल एक मैच गंवाया था। टीम ने कोई सीरीज नहीं हारी। वन-डे मुकाबलों में भी टीम का प्रदर्शन शानदार रहा।

कुंबले के कार्यकाल में भारत ने 13 वन-डे मैच में आठ जीते, जबकि पांच मैच गंवाए। वहीं पांच टी-20 मैचों में भारत ने दो मैच जीते, दो मैच हारे और एक का कोई नतीजा नहीं निकला, लेकिन बदली हुए हालातों में अपने इसी कद के चलते कुंबले बीसीसीआई के पुराने अधिकारियों की नजरों में भी खटकने लगे थे।

कुंबले

दरअसल, टीम इंडिया के खिलाड़ियों को सीरीज समाप्त होने के छह-छह महीने बाद तक भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ता था। यह बात कुंबले ने विनोद राय की अध्यक्षता वाले क्रिकेट प्रशासकों के सामने रख दी थी। क्रिकेट प्रशासकों ने बोर्ड के अधिकारियों को सीरीज के तुरंत बाद भुगतान करने का आदेश सुनाया।

कुंबले की ये पहल भले खिलाड़ियों के हित में रही हो और बोर्ड का इसमें कोई नुकसान भी नहीं हो, लेकिन बोर्ड को संभालने वालों को ये अपने अधिकार क्षेत्र में दखल लगा। लिहाजा बोर्ड के पुराने अधिकारी भी कुंबले को विदा करने का मौका तलाशने लगे थे और उन्हें इसके लिए कोहली का सहारा भी मिल गया।

अनिल कुंबले और विराट कोहली
पूरे 10 विकेट लेने के दौरान कुंबले
भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने वेस्टइंडीज दौरे तक उन्हें टीम के साथ रखने की कोशिश करके उन्हें सम्मानजनक विदाई देने का रास्ता जरूरत तैयार कर रही थी, लेकिन 2017 चैम्पियंस ट्रॉफी फाइनल की करारी हार के बाद कुंबले ने ही शायद ये मान लिया कि अब बहुत हुआ। कुंबले का कार्यकाल 20 जून 2017 को पूरा हो रहा था और उससे करीब एक महीने पहले 31 मई को भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने मुख्य कोच का आवेदन मंगा लिया, जो इस बात की तस्दीक कर रहा था कि अब कुंबले की विदाई तय है। क्रिकेट को करीब से जानने वालों को यह पता था कि कुंबले इतने सीधे और सरल भी नहीं हैं कि उन्हें इन सबका अंदाजा नहीं रहा होगा। अनिल कुंबले निसंदेह इससे बेहतर विदाई के हकदार थे, ये बात जोरशोर से कही जा रही है, लेकिन ऐसी बात कहने वालों को शायद इसका अंदाजा हो कि कपिल देव को किन परिस्थितियों में कोच पद से जाना पड़ा था या फिर मदन लाल और संदीप पाटिल की देखते-देखते कैसे विदाई हो गई। अजीत वाडेकर और बिशन सिंह बेदी भी ऐसे ही रुखसत किए गए थे। चाहे कोच हो या फिर खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट में राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण, वीरेंद्र सहवाग और युवराज सिंह जैसों खिलाड़ियों का संन्यास यह बताने के लिए काफी है कि भारतीय क्रिकेट अपने दिग्गजों से इसी तरह पेश आता रहा है।

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