लेफ्ट के 34 साल के शासन का CM ममता ने किया अंत, ऐसा रहा टीएमसी का राजनीतिक सफर

ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस या तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पश्चिम बंगाल की प्रमुख पार्टियों में से एक है। इस पार्टी का गठन ममता बनर्जी ने कांग्रेस पार्टी से अलग होकर एक जनवरी 1998 को किया था। चुनाव आयोग ने दिसंबर 1999 में इस पार्टी को रजिस्टर्ड किया और जोड़ा घास फूल (Jora Ghas Phul) पार्टी का पहचान चिन्ह दिया। चुनाव आयोग ने दो सितंबर 2016 को इसे राष्ट्रीय पार्टी के रूप में मान्यता दी। टीएमसी वर्तमान (16वीं लोक सभा) में चौथी बड़ी पार्टी है। इसके 34 लोकसभा सदस्य हैं।

पश्चिम बंगाल में लंबे समय से चली आ रही सीपीएम सरकार ने टाटा कंपनी को नैनो प्रोजेक्ट के लिए जमीन थी। इसके लिए दिसंबर 2006 में, हल्दिया विकास प्राधिकरण ने नंदीग्राम के लोगों नोटिस दिया था कि जमीन के एक बड़े हिस्से को जब्त कर लिया जाएगा। जिससे 70 हजार लोग बेघर हो जाते। इसके विरोध में लोगों ने भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया। तृणमूल कांग्रेस ने बिना देरी किए आंदोलन की अगुवाई शु्रू कर दी और भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमिटी (BUPC) का गठन किया। पुलिस ने आंदोलन को कुचलने के लिए 14 मार्च 2007 को प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की। इसमें 14 किसान मारे गए।

कई सूत्रों ने दावा किया था कि सीपीएम के कार्यकर्ताओं और पुलिस ने नंदीग्राम में प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसाई। ऐसा ही प्रदर्शन सिंगूर में हुआ। हिंसा के खिलाफ में बड़े पैमाने पर बुद्धिजीवियों ने प्रदर्शन किए। सीपीएम सरकार के खिलाफ आम लोगों गुस्सा बढ़ गया। जिसका फायदा टीएमसी को मिला। नंदीग्राम और सिंगूर के बाद 2009 लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने पश्चिम बंगाल में 19 सीटें जीती। 2010 में हुए कोलकाता नगर निगम चुनाव में टीएमसी ने 141 में से 97 सीटों पर कब्जा किया। इसके अलावा कई नगर निगम चुनावों में भारी सफलता मिली।

उसके बाद टीएमसी आगे बढ़ती गई। 2011 विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने कांग्रेस पार्टी और एसयूसीआई(सी) के साथ मिलकर कुल 294 सीटों में से 227 सीटों पर कब्जा किया। टीएमसी 184 सीटें जीतने में कामयाब हुई। अब टीएमसी ने आधार दूसरे राज्यों में फैलाया। असम, मणिपुर, त्रिपुरा, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, सिक्किम, हरियाणा और अरूणाचल प्रदेश में टीएमसी का जनाधार बढ़ा। इससे चुनाव आयोग ने इसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिया। टीएमसी ने केरल में पांच सीटों पर चुनाव लड़ा।

टीएमसी चीफ ममता बनर्जी ने 18 सितंबर 2012 को रिटेल में एफडीआई, डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, रसोई गैस सिलेंडर की सब्सिडी को लेकर यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। 1998 लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने 7 सीटें जीती थीं। अगले लोकसभा चुनाव 1999 में 8 सीटें जीतीं। 2001 विधानसभा चुनावों में 60 सीटें, 2006 विधानसभा चुनाव में 30 सीटें जीती थीं। लेकिन 2011 में लगातार 34 साल प्रदेश में राज करने वाली सीपीएम को तगड़ा झटका देते हुए कुल 294 विधानसभा सीटों में से 184 सीटें जीतकर ममता बनर्जी पहली बार मुख्यमंत्री बनीं। फिर 2016 विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने अपनी जीती को और मजबूत करते हुए 211 सीटें जीतने में कामयाब हुई और लगातार दूसरी बार पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने में कामयाब हुई।

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